नोएडा। किसानों के आबादी भूखंड, डिनोटिफिकेशन और गांवों के विकास जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर 24 जून 2026 को ग्राम विकास संगठन नोएडा और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने बताया कि इससे पहले 29 मई 2026 को नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल, ओएसडी क्रांति शेखर, महाप्रबंधक नियोजन अरविंद कुमार, महाप्रबंधक अशोक कुमार अरोड़ा और महाप्रबंधक एसपी सिंह के साथ विस्तृत बैठक हुई थी, जिसमें किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई थी।
10 प्रतिशत आबादी भूखंड और डिनोटिफिकेशन का मुद्दा फिर उठेगा
अशोक चौहान ने बताया कि पिछली बैठक में अर्जित भूमि के सापेक्ष करार नियमावली-1997 के तहत सभी किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड देने, आबादी क्षेत्र को “जहां है, जैसी है” के आधार पर भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 की धारा-48 के तहत डिनोटिफाई करने तथा नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के गांवों को मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने की मांग प्रमुखता से रखी गई थी। इन बिंदुओं पर हुई चर्चा के बाद ओएसडी क्रांति शेखर द्वारा सक्षम स्तर से अनुमोदन प्राप्त कर बैठक का कार्यवृत्त भी जारी किया गया था।
‘कागज किसानों के पक्ष में, फिर भी नहीं मिला हक’
ग्राम विकास संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने आरोप लगाया कि नोएडा प्राधिकरण ने वर्षों से किसानों के साथ छल-कपट किया है। उनका कहना है कि किसानों के पक्ष में दस्तावेज और रिकॉर्ड मौजूद होने के बावजूद उन्हें उनका वैधानिक हक और अधिकार नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन लेने के बाद भी आबादी भूखंड और अन्य अधिकारों को लेकर लगातार टालमटोल की जा रही है, जिसके चलते किसान बार-बार आंदोलन करने को मजबूर हैं।

बैठक पर टिकी किसानों की नजरें
24 जून को होने वाली बैठक को किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि इस बार भी किसानों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन और तेज किया जा सकता है। अब किसानों की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं कि क्या वर्षों से लंबित आबादी भूखंड और गांवों के विकास से जुड़े मुद्दों का समाधान निकलता है या फिर एक बार फिर केवल आश्वासनों का दौर चलता है।


