नोएडा। जिले में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर डीडी आरडब्ल्यूए फेडरेशन ने बड़ा सवाल उठाया है। फेडरेशन के अध्यक्ष एन.पी. सिंह और वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजीव कुमार का कहना है कि शहरवासियों को बेहतर और सुरक्षित पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराना सरकार, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि नई बस सेवाएं शुरू होने के शुरुआती दौर में घाटा होना स्वाभाविक है, लेकिन इसके आधार पर योजनाओं को कमजोर नहीं किया जा सकता। जरूरत इस बात की है कि लोग निजी और अव्यवस्थित साधनों की बजाय सरकारी बसों का उपयोग करें।
AC बसें चल रहीं, लेकिन सवारियां क्यों नहीं आ रहीं?
फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान में जिले में चल रही अधिकांश बसें इलेक्ट्रिक हैं, इसलिए ईंधन खर्च का दबाव भी नहीं है। इसके बावजूद बसों में यात्रियों की संख्या अपेक्षित नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण शहर में बड़ी संख्या में बिना परमिट और अनाधिकृत रूप से चल रहे ई-रिक्शा और थ्री व्हीलर बताए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि ये वाहन न केवल सरकारी परिवहन व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था को भी चरमरा रहे हैं।
‘शहर की सड़कें युद्ध का मैदान बन चुकी हैं’
एन.पी. सिंह और संजीव कुमार ने कहा कि शहर के प्रमुख मार्गों पर अनियंत्रित ई-रिक्शा और थ्री व्हीलरों के कारण हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। कई चालक यातायात नियमों की अनदेखी करते हुए सवारियां भरते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। उनका कहना है कि जल्दबाजी में लोग अपनी सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं और हादसे होने के बाद पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता।
‘कार्रवाई हो जाए तो बदल सकती है तस्वीर’
फेडरेशन ने आरोप लगाया कि अवैध रूप से चल रहे वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के पीछे सरकारी तंत्र की मिलीभगत भी एक बड़ा कारण है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन सख्ती दिखाए और बिना परमिट चल रहे ई-रिक्शा व थ्री व्हीलरों पर कार्रवाई करे तो शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधर सकती है और लोग स्वाभाविक रूप से सरकार की एयर कंडीशनर बस सेवाओं की ओर आकर्षित होंगे। फेडरेशन ने तीनों प्राधिकरणों और परिवहन विभाग से सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाने की भी मांग की है।


