[gtranslate]
[gtranslate]

नोएडा में एक्सपर्ट ने खोली सड़कों की गुणवत्ता की पोल, कमजोर मॉनिटरिंग और ऑडिट को बताया बड़ी बाधा

 नोएडा। भारत में सड़क कनेक्टिविटी लगातार बेहतर हो रही है और एक्सप्रेसवे, हाईवे समेत कई बड़ी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कमजोर मॉनिटरिंग और ऑडिट के कारण सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। डिजाइन और तय मानकों के बावजूद कई परियोजनाओं में सड़क उखड़ने, दरारें आने, धंसने और जलभराव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ये बातें दैनिक जागरण के नोएडा सेक्टर-63 स्थित कार्यालय में सोमवार को आयोजित जागरण विमर्श कार्यक्रम में एनसीईआर के वरिष्ठ सलाहकार एवं सीआरआरआई के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक एस. वेलमुरुगन ने कहीं। उन्होंने सड़क निर्माण के हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों को जमीन पर लागू करने पर जोर दिया।

कानपुर-लखनऊ समेत कई एक्सप्रेसवे पर सामने आईं खामियां

मॉनिटरिंग की कमी को बताया गुणवत्ता में गिरावट का कारण। सरकार की ओर से पीपीपी, हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) समेत विभिन्न मॉडलों के तहत एक्सप्रेसवे और हाईवे का निर्माण कराया जा रहा है। निरीक्षण के लिए इंजीनियरों की नियुक्ति और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होने के बावजूद कई परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता से जुड़ी खामियां सामने आ रही हैं। हाल ही में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे समेत एनसीआर की विभिन्न परियोजनाओं में एक वर्ष के भीतर सड़क उखड़ने, दरारें आने, धंसने और जलभराव की घटनाओं ने मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कागजों तक सीमित न रहें अंतरराष्ट्रीय मानक, जमीन पर हो पालन

एस. वेलमुरुगन ने जवाबदेही तय करने को बताया जरूरी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से शुरू हुआ देश में सड़क निर्माण और कायाकल्प का दौर आज आधुनिक हाईवे और एक्सप्रेसवे तक पहुंच चुका है। सड़क निर्माण कंपनियों के पास अंतरराष्ट्रीय मानक, आधुनिक उपकरण और पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध हैं, लेकिन निर्माण के दौरान मानकों का सही तरीके से पालन नहीं होना और प्रभावी मॉनिटरिंग की कमी गुणवत्ता में गिरावट का बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि एचएएम मॉडल में सरकार की 40 प्रतिशत और निजी निवेशक की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी होती है तथा प्रोजेक्ट डायरेक्टर निर्माण की जिम्मेदारी संभालता है।

खामियां मिलने पर कंपनियों पर हो कड़ी कार्रवाई

एनएचएआई की शक्तियां बढ़ाने और दोषी कंपनियों की जवाबदेही तय करने की मांग। एस. वेलमुरुगन ने कहा कि एनएचएआई और सड़क मंत्रालय के अधीन हाईवे व एक्सप्रेसवे का निर्माण होता है। बड़ी कंपनियां टेंडर लेकर पैकेज के आधार पर परियोजनाओं को पूरा करती हैं, लेकिन घटिया निर्माण के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खामियां मिलने पर संबंधित निर्माण कंपनियों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार कार्रवाई के बाद कंपनियां नाम बदलकर दोबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो जाती हैं। ऐसे में सरकारी एजेंसियों को काम पूरा कराने के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने और दोषी कंपनियों की स्पष्ट जवाबदेही तय करने पर विशेष ध्यान देना होगा।

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

इसे भी पढे ----

वोट जरूर करें

नोएडा से 2027 विधानसभा चुनाव कौन जीतेगा?

View Results

Loading ...

आज का राशिफल देखें