नोएडा। नोएडा प्राधिकरण अब अपनी लैंड बैंक की निगरानी आधुनिक तकनीक की मदद से करेगा। प्राधिकरण की खाली पड़ी जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जे और निर्माण पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सेटेलाइट इमेज का सहारा लिया जाएगा। इस योजना के तहत प्राधिकरण एक निजी कंपनी के साथ अनुबंध करने की तैयारी कर रहा है, जिसका अंतिम निर्णय शुक्रवार को प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कृष्णा करुणेश के समक्ष होने वाले प्रस्तुतीकरण के बाद लिया जाएगा।
प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार, अनुबंध होने के बाद जरूरत पड़ने पर संबंधित भूखंड की दो से तीन माह पुरानी सेटेलाइट तस्वीरें भी उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इन तस्वीरों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी भूखंड पर निर्माण कार्य कब शुरू हुआ और उससे पहले उस जमीन की वास्तविक स्थिति क्या थी।
इस तकनीक के माध्यम से अवैध निर्माण और अतिक्रमण की समय रहते पहचान करना आसान होगा। यदि किसी भूखंड पर बिना अनुमति निर्माण या कब्जा किया जाता है, तो सेटेलाइट इमेज के आधार पर कार्रवाई के लिए ठोस साक्ष्य उपलब्ध होंगे। इससे प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि नोएडा में प्राधिकरण की खाली पड़ी जमीनों पर अवैध कब्जे और निर्माण के कई मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने और सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण अब तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।


