[gtranslate]
[gtranslate]

देश में अब पता बताने का तरीका होगा और सटीक, पिन कोड के साथ जुड़ा डिजिपिन

नोएडा।देश में पता बताने की 54 साल पुरानी व्यवस्था अब डिजिटल तकनीक के साथ एक कदम आगे बढ़ रही है। वर्ष 1972 में शुरू हुई छह अंकों की पिन कोड व्यवस्था के साथ अब डिजिपिन (डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर) जुड़ गया है। भारतीय डाक विभाग ने आईआईटी हैदराबाद और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), इसरो के सहयोग से इसे विकसित किया है।

चार मीटर तक सटीक लोकेशन की सुविधा

डिजिपिन के तहत देश के भौगोलिक क्षेत्र को लगभग चार मीटर गुणा चार मीटर के छोटे-छोटे वर्गाकार ग्रिड में बांटा गया है। प्रत्येक ग्रिड के लिए अक्षांश और देशांतर के आधार पर एक विशिष्ट 10 अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड तैयार किया जाता है। इससे किसी स्थान की पहचान बेहद सटीक तरीके से की जा सकेगी।

मकान और सड़क की पहचान नहीं होने पर भी मिलेगी लोकेशन

डिजिपिन का सबसे बड़ा लाभ उन क्षेत्रों को मिलेगा, जहां मकान नंबर, गली या सड़क की स्पष्ट पहचान नहीं है। ऐसे स्थानों पर डाक और पार्सल की डिलीवरी अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी। इससे किसी स्थान की पहचान केवल पारंपरिक पते पर निर्भर नहीं रहेगी।

पिन कोड से अलग होगी डिजिपिन की भूमिका

पिन कोड जहां एक बड़े क्षेत्र की पहचान करता है, वहीं डिजिपिन उसी क्षेत्र के भीतर किसी खास स्थान की सूक्ष्म भौगोलिक पहचान उपलब्ध कराएगा। इसके बाद लंबे पते का विवरण देने के बजाय किसी स्थान की डिजिटल पहचान के लिए डिजिपिन का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

 

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

इसे भी पढे ----

वोट जरूर करें

नोएडा से 2027 विधानसभा चुनाव कौन जीतेगा?

View Results

Loading ...

आज का राशिफल देखें