नोएडा। आज के दौर में बच्चे स्क्रीन और तनाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने शुक्रवार को एक अनोखा प्रयोग किया। सेक्टर-70 स्थित फाउंडेशन में शनिवार को ‘ROOTED & RISING – A Creative Movement Session’ का आयोजन किया गया। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, उनके अभिभावकों और आम लोगों ने भाग लिया। करीब दो घंटे चले सत्र में शब्दों के बजाय शरीर, सांस और हरकतों को संवाद का माध्यम बनाया गया।
वार्म-अप और गाइडेड मूवमेंट से खुद से जुड़ने का अभ्यास
सत्र का संचालन क्रिएटिव मूवमेंट थेरेपिस्ट ऊष्मा ने किया। उन्होंने वार्म-अप, गाइडेड मूवमेंट और समूह गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने शरीर और भावनाओं से जुड़ने का अभ्यास कराया। ऊष्मा ने कहा, “मूव करना सीखना जरूरी नहीं है। आपका शरीर पहले से ही जानता है। यह सत्र उसे एक साथ सुनने का अभ्यास था।” उन्होंने बताया कि क्रिएटिव मूवमेंट थेरेपी बिना बोले भावनाओं को व्यक्त करने और तनाव कम करने का प्रभावी माध्यम है। सत्र के दौरान बच्चों और अभिभावकों ने आत्म-जागरूकता और आपसी जुड़ाव को महसूस किया।
बच्चों में गुस्सा और आत्मविश्वास की कमी को मिलेगी सकारात्मक दिशा
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. महीपाल सिंह ने कहा कि आज बच्चे और युवा इंट्रोवर्जन, गुस्सा, बुलिंग और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं से गुजर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डांस मूवमेंट एक्टिविटी थेरेपी दिमाग, मांसपेशियों और न्यूरोप्लास्टिसिटी पर काम करती है। इससे बच्चों की भावनात्मक और व्यवहार संबंधी समस्याओं को सकारात्मक दिशा देने में मदद मिल सकती है। यह थेरेपी अभिभावकों को भी बच्चों के शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल संकेत समझने में मदद करती है।
स्कूल-कॉलेज और सोसायटियों में नियमित सत्र कराने की मांग
डॉ. महीपाल सिंह ने कहा कि ऐसे सत्र स्कूलों, कॉलेजों और सोसायटियों में नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि बच्चों और युवाओं को तनाव से निपटने और अपनी भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिल सके। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। फाउंडेशन ने कहा कि भविष्य में भी समावेशिता और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।


