नोएडा की स्काईवॉक परियोजना बनी सुस्ती की मिसाल, लागत में लगातार इजाफा

 नोएडा। सेक्टर-52 (ब्लू लाइन) और सेक्टर-51 (एक्वा लाइन) मेट्रो स्टेशन को जोड़ने के लिए बनाई जा रही स्काईवॉक परियोजना तय समय से काफी पीछे चल रही है। जिस परियोजना को पांच माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, वह तीन वर्ष बीतने के बाद भी अधूरी है। लगातार बढ़ती लागत और देरी के कारण परियोजना पर सवाल उठने लगे हैं।

डिजाइन की खामियां बनीं देरी की वजह

परियोजना के डिजाइन में ऐसी तकनीकी खामियां सामने आईं, जिनका असर निर्माण कार्य पर पड़ा। दोनों मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाले स्काईवॉक के मुहाने पर मेट्रो के पिलरों की बीमें आ गईं। इसके चलते प्रस्तावित छह मीटर चौड़े स्काईवॉक को कई स्थानों पर घटाकर तीन मीटर तक करना पड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार प्रारंभिक डिजाइन तैयार करते समय इन तकनीकी पहलुओं का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया।

10 बार बढ़ी डेडलाइन, बजट भी लगातार बढ़ा

स्काईवॉक परियोजना की समयसीमा अब तक 10 बार बढ़ाई जा चुकी है। शुरुआत में सिविल कार्यों के लिए लगभग 15.10 करोड़ रुपये और विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए 15.90 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित था। हालांकि हर नई डेडलाइन के साथ परियोजना की लागत बढ़ती गई और नौवीं डेडलाइन तक बजट 42 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया।

नई समयसीमा के बाद भी काम अधूरा

दसवीं डेडलाइन तय करते समय परियोजना में 2.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी मंजूर किया गया। इसके बावजूद नई समयसीमा तय हुए तीन माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका। बढ़ती लागत और लगातार हो रही देरी ने परियोजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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