डायट प्रवक्ता राजेश खन्ना ने बताया कि 6 जुलाई से प्रशिक्षण कार्यक्रम चार चरणों में शुरू होंगे। पहले चरण में माध्यमिक विद्यालयों के लगभग 200 शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण पद्धति, सुरक्षा, संवेदनशीलता तथा क्षमता निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों को केवल परीक्षा केंद्रित शिक्षा तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करने में सक्षम बनाना है।
डायट प्रवक्ता दीक्षा के अनुसार वर्षभर प्रज्ञा प्रवाह, अरुणोदय एवं आनंदम, नेतृत्व विकास, एआई आधारित शैक्षिक संवर्धन, खेल मॉड्यूल, फोनेटिक्स इंटीग्रेटेड, संस्कृत संदर्शिका तथा आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण, तकनीक के प्रभावी उपयोग और नवाचार आधारित कक्षा संचालन के व्यावहारिक कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन पर लगभग 40 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस बजट से अध्ययन सामग्री, विशेषज्ञ प्रशिक्षकों, तकनीकी संसाधनों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। डायट का लक्ष्य शिक्षकों की दक्षता में वृद्धि कर विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार लाना तथा शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।


