नोएडा। जिला अस्पताल में नियमों की अनदेखी कर कथित तौर पर चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने के मामले में पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. रेनू अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में मरीजों के भोजन, लिफ्ट रखरखाव और इलेक्ट्रिकल कार्यों से जुड़े टेंडरों में अनियमितताओं के आरोप सही पाए गए हैं।
तीन महीने पहले सौंपी गई रिपोर्ट
एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर करीब तीन महीने पहले रिपोर्ट महानिदेशक (डीजी) स्वास्थ्य को सौंप दी थी। रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है और मामले में आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
50 करोड़ से अधिक के घोटाले की आशंका
जांच के दौरान एसआईटी ने आशंका जताई है कि जिला अस्पताल में पिछले आठ से नौ वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार पूरे मामले में 50 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की संभावना व्यक्त की गई है।
विजिलेंस जांच की सिफारिश
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने इसकी विस्तृत जांच विजिलेंस विभाग से कराने की सिफारिश की है। यदि सिफारिश पर अमल होता है तो टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी, जिससे कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।


