
नोएडा। यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बुधवार को नोएडा प्राधिकरण में अहम बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई ऑनलाइन बैठक में यमुना की सफाई को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों को यमुना में प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी एक्शन प्लान और कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसमें नालों के पानी को पूरी तरह शोधित करने और यमुना में जाने वाले प्रदूषित पानी को रोकने पर विशेष जोर दिया गया।

नोएडा क्षेत्र में करीब 17 किलोमीटर यमुना का हिस्सा
नोएडा क्षेत्र में यमुना का करीब 17 किलोमीटर हिस्सा आता है। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से कोंडली नाला यमुना में गिरता है। नोएडा के छोटे-बड़े कई नाले इसी नाले से जुड़कर अपना पानी आगे पहुंचाते हैं। ऐसे में कोंडली नाले में जाने वाले पानी की गुणवत्ता सुधारना यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए अहम माना जा रहा है।
24 एसटीपी लगाने की योजना पर चल रहा काम
प्राधिकरण का दावा है कि नालों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित पानी ही डाला जा रहा है। इसके साथ ही प्राधिकरण ने नालों के पानी को और बेहतर तरीके से शोधित करने के लिए अपने स्तर पर भी योजना तैयार की है। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी के अनुसार, योजना के तहत नालों पर कुल 24 एसटीपी प्लांट लगाए जाने हैं। इनमें से आठ एसटीपी लगाए जा चुके हैं, जबकि तीन फाइटो-फाइटो ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जाएंगे।
दिसंबर 2028 तक सभी प्रस्तावित एसटीपी लगाने का लक्ष्य
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित 13 एसटीपी में से पांच की डीपीआर की आईआईटी दिल्ली से जांच कराई जा रही है। इन्हें दिसंबर 2027 तक लगाए जाने का लक्ष्य है। वहीं, शेष आठ एसटीपी दिसंबर 2028 तक स्थापित किए जाएंगे। इन प्लांट के शुरू होने के बाद नालों में पहुंचने वाले पानी को और बेहतर तरीके से शोधित किया जा सकेगा। इससे पानी में सीओडी और बीओडी का स्तर नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और यमुना में प्रदूषण का भार कम करने का प्रयास किया जाएगा।


