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शिक्षा केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं, अनुभव से मिलती है असली सीख

नोएडा। शिक्षा केवल किताबों के पन्नों और परीक्षा में मिलने वाले अंकों तक सीमित नहीं है। एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ा संतोष तब होता है, जब उसके विद्यार्थी कक्षा से बाहर निकलकर अपने ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन में करते हैं। भूगोल शिक्षक दीपेश यास्क का मानना है कि विद्यार्थियों को केवल विषय पढ़ाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें देखने, समझने, सवाल करने और स्वयं अनुभव के माध्यम से सीखने के अवसर भी मिलने चाहिए।

गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर

कक्षा 9 से 12 तक सामाजिक विज्ञान और भूगोल पढ़ाने वाले दीपेश यास्क अपने शिक्षण में स्मार्ट क्लास, डिजिटल संसाधन, मानचित्र निर्माण, प्रोजेक्ट, समूह गतिविधियों और गतिविधि-आधारित शिक्षण को विशेष महत्व देते हैं। उनका कहना है कि भूगोल जैसे विषय को केवल किताबों के माध्यम से समझना कई बार कठिन होता है, लेकिन जब विद्यार्थी स्वयं मानचित्र बनाते हैं, स्थानों को चिन्हित करते हैं, आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं और विभिन्न भौगोलिक घटनाओं को गतिविधियों के जरिए समझते हैं, तो विषय उनके लिए अधिक रोचक और यादगार बन जाता है।

बदलते दौर में शिक्षक की नई भूमिका

दीपेश यास्क का कहना है कि वर्तमान समय में शिक्षा तेजी से बदल रही है और इसके साथ शिक्षक की भूमिका भी पहले जैसी नहीं रही। अब शिक्षक केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का मार्गदर्शक, प्रेरक और सीखने की पूरी प्रक्रिया का साथी बन गया है। ऐसे में शिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करना होना चाहिए।

आत्मविश्वासी और सक्षम नागरिक बनाना लक्ष्य

उन्होंने कहा कि उनका प्रयास हमेशा यही रहता है कि विद्यार्थी विद्यालय से केवल अच्छे अंक या प्रमाणपत्र लेकर ही न निकलें, बल्कि उनमें सोचने-समझने की क्षमता, सही निर्णय लेने का आत्मविश्वास और अपने भविष्य को स्वयं दिशा देने का साहस भी विकसित हो। यही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य और एक शिक्षक की सबसे बड़ी सफलता है।

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