नोएडा के नवीन फल एवं सब्जी मंडी में कैंटीन टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक व्यापारी ने ऑनलाइन बोली प्रक्रिया में गड़बड़ी और मिलीभगत का आरोप लगाते हुए दोबारा टेंडर कराने की मांग की है। हालांकि मंडी समिति प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया है।
“वेबसाइट समय से पहले बंद कर दी गई”
मामला 5 जून को आयोजित ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया का है। मंडी समिति की ओर से कैंटीन संचालन के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक ऑनलाइन बोली लगाने का समय तय किया गया था।
टेंडर प्रक्रिया में शामिल व्यापारी त्रिलोक चंद का आरोप है कि वेबसाइट तय समय से पहले तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गई, जिससे वह अपनी बोली पूरी नहीं कर सके। उनका दावा है कि उन्होंने 19 लाख 40 हजार रुपये की बोली लगाई थी, जो सबसे अधिक थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें टेंडर नहीं दिया गया।
व्यापारी ने आरोप लगाया कि मिलीभगत कर कम बोली लगाने वाले व्यक्ति को तीन साल के लिए कैंटीन का टेंडर सौंप दिया गया।
21 व्यापारियों ने खरीदे थे टेंडर फॉर्म
मंडी समिति द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कैंटीन टेंडर के लिए कुल 21 व्यापारियों ने आवेदन पत्र खरीदे थे। इनमें से 14 ने अपने प्रपत्र जमा किए और 13 व्यापारियों ने ऑनलाइन बोली प्रक्रिया में भाग लिया।
समिति के मुताबिक जांच के बाद छह आवेदन वैध पाए गए और इनमें सबसे अधिक 18 लाख 90 हजार रुपये की बोली लगाने वाले आवेदक को तीन वर्ष के लिए टेंडर आवंटित किया गया।
सचिव बोले- “प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी”
मामले पर मंडी समिति के सचिव पंकज शर्मा ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि वेबसाइट दोपहर दो बजे तक सक्रिय रही और सभी ऑनलाइन प्रपत्र नियमानुसार स्वीकार किए गए।
सचिव ने कहा कि लगाए गए आरोप निराधार हैं और प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई।
अब दोबारा टेंडर की उठी मांग
व्यापारी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मंडी के व्यापारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कुछ व्यापारी पूरे मामले की जांच और तकनीकी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बोली प्रक्रिया तय समय तक चली थी या नहीं।






