
नोएडा। बच्चों में बदलता व्यवहार अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। बच्चा सामने बैठा होता है, लेकिन पुकारने पर पलटकर नहीं देखता। खिलौने हाथ में होने के बावजूद उनसे खेलने के बजाय उन्हें एक कतार में सजाता रहता है। कुछ बच्चों की दुनिया मोबाइल स्क्रीन तक सिमटती जा रही है। ऐसे व्यवहार को लेकर अभिभावक नोएडा के जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) पहुंच रहे हैं।

बच्चों के व्यवहार में दिख रहे बदलाव
हाथ फड़फड़ाना और दूसरों से घुलने-मिलने में कम रुचि चिंता बढ़ा रही है। कुछ बच्चों में बार-बार वस्तुओं को कतार में सजाने, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देने और सामाजिक संपर्क से बचने जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इन लक्षणों को लेकर अभिभावक विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं। हालांकि, केवल मोबाइल इस्तेमाल या इन व्यवहारों के आधार पर ऑटिज्म की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा उचित जांच और मूल्यांकन जरूरी है।
छह महीने में पहुंचे 15 हजार से अधिक बच्चे
केंद्र में बच्चों से जुड़े मामलों की संख्या बड़ी चिंता की ओर इशारा कर रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बीते एक साल में देशभर से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, मोबाइल की लत और ऑटिज्म से जुड़े मामलों में 25 हजार से अधिक बच्चे पहुंचे। वहीं, पिछले छह महीनों में 15 हजार से अधिक बच्चों के केंद्र पहुंचने की जानकारी दी गई है। इन आंकड़ों में अलग-अलग समस्याओं वाले बच्चों के मामले शामिल हैं।
नोएडा के करीब 200 मामले भी शामिल
दिल्ली-एनसीआर के बच्चों की संख्या भी उल्लेखनीय बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, केंद्र पहुंचने वाले बच्चों में करीब 200 मामले नोएडा के हैं। लगभग 50 प्रतिशत बच्चे दिल्ली-एनसीआर, नोएडा और गाजियाबाद से बताए गए हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, मेरठ और बदायूं सहित हरियाणा तथा मध्य प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से भी बच्चे केंद्र पहुंच रहे हैं। बच्चों में व्यवहार संबंधी बदलाव दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।


