
नोएडा। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) के पहले चरण की पाबंदियां लागू होने के बावजूद नोएडा में प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई का खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नोएडा प्राधिकरण की ओर से जुर्माना लगाने की कार्रवाई तो की जा रही है, लेकिन इसकी वसूली नहीं होने से कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अधिकारी जुर्माना लगाने तक ही सीमित हैं, जबकि प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्ती का अभाव बना हुआ है।

नोएडा का एक्यूआई 251, ग्रेटर नोएडा में 219
प्रदूषण का बढ़ता स्तर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। बृहस्पतिवार को नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 251 और ग्रेटर नोएडा का 219 दर्ज किया गया। हवा की गुणवत्ता खराब होने के बावजूद प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर सवाल उठ रहे हैं। लगातार बढ़ते प्रदूषण के बीच ग्रेप के तहत लागू पाबंदियों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
नौ साल में जुर्माने की वसूली महज तीन प्रतिशत
जुर्माना लगाने और उसकी वसूली के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। खबर में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले लगभग नौ वर्षों में प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई तो की गई, लेकिन कुल जुर्माने की करीब तीन प्रतिशत राशि ही वसूल हो सकी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जुर्माने की रकम ही वसूल नहीं हो पा रही है, तो प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई का कितना असर पड़ रहा है। ग्रेप लागू होते ही विभागों की सक्रियता भी सवालों के घेरे में है।
अक्टूबर में 65 लाख का जुर्माना, वसूली नहीं
हर साल प्रदूषण बढ़ने के साथ जुर्माने की कार्रवाई तेज होती है, लेकिन वसूली का रिकॉर्ड चिंता बढ़ा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर में प्रदूषण फैलाने वालों पर करीब 65 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, लेकिन इसकी वसूली नहीं होने की बात सामने आई है। पिछले वर्षों में भी जुर्माना लगाने के बावजूद वसूली नहीं होने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल जुर्माना लगाना ही नहीं, बल्कि उसकी वसूली और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।


