
ग्रेटर नोएडा । परी चौक से संचालित होने वाली बसें उत्तर प्रदेश के कई शहरों के साथ दूसरे राज्यों के प्रमुख शहरों तक यात्रियों को लेकर जाती हैं। इन बसों के संचालन, परमिट, फिटनेस और यात्री क्षमता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर सफर कराया जा रहा है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

लखनऊ से गोरखपुर और झांसी तक बसों का संचालन
परी चौक से चलने वाली बसें लखनऊ, कानपुर, कानपुर देहात, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, आगरा, बलिया, झांसी, ग्वालियर, बांदा, महोबा, हमीरपुर, उरई, राठ, चरखारी और बेलाताल समेत प्रदेश के कई शहरों तक जाती हैं। इन लंबे रूट पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं।
पटना से देहरादून तक चल रही बसें
परी चौक से पटना, मुजफ्फरपुर, हरिद्वार और देहरादून समेत अन्य रूट पर भी बसों का संचालन होने की जानकारी है। इन बसों में यात्रियों से करीब 500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक किराया लिया जाता है। आरोप है कि किराया वसूलने के बावजूद कुछ बस संचालक क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर उनकी सुरक्षा से समझौता कर रहे हैं।
रोजाना लाखों की कमाई का दावा
उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रतिदिन करीब चार हजार यात्रियों के सफर करने का अनुमान लगाया जा रहा है। यदि यात्रियों से औसतन किराया वसूली को आधार माना जाए तो बस संचालन से प्रतिदिन करीब 60 लाख रुपये की कमाई का दावा किया जा रहा है। इस हिसाब से 30 दिनों में यह रकम करीब 18 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।


