गोविंदा यादव, दादरी/गौतम बुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के 3 अगस्त को प्रस्तावित दादरी दौरे से पहले गौतम बुद्ध नगर की राजनीति में बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष के भव्य स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस आयोजन को लेकर पार्टी के भीतर सुलग रही गुटबाजी अब खुलकर सतह पर आ गई है। स्वागत की तैयारियों से ज्यादा चर्चा उन पोस्टरों और बैनरों की हो रही है, जिनमें पार्टी के कई बड़े चेहरे या तो पूरी तरह गायब हैं या उन्हें बेहद सीमित जगह दी गई है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और शक्ति प्रदर्शन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
क्या कार्यक्रम संगठन का है या किसी एक खेमे का शक्ति प्रदर्शन?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूरे आयोजन की कमान राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर और वरिष्ठ नेता नवाब सिंह नागर के हाथों में है। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कार्यक्रम को संगठनात्मक आयोजन की बजाय एक खास राजनीतिक धड़े के शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश किया जा रहा है। इसी वजह से जिले के कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को सीमित कर दिया गया है।
पोस्टरों से गायब बड़े चेहरे, कार्यकर्ताओं में बढ़ी नाराजगी
सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार में लगाए गए पोस्टरों और होर्डिंग्स में क्षेत्रीय सांसद डॉ. महेश शर्मा, नोएडा विधायक पंकज सिंह, जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह, बीजेपी जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा और प्रदेश मंत्री महामेधा नागर के नाम और तस्वीरें या तो दिखाई नहीं दे रहीं या उन्हें बेहद कम महत्व दिया गया है। इसे लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष की चर्चा तेज है।

स्थानीय दिग्गजों की अनदेखी पर उठे सवाल
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि दादरी विधायक मास्टर तेजपाल सिंह नागर, पूर्व मंत्री नरेंद्र भाटी और वरिष्ठ नेता हरिश्चंद्र भाटी जैसे प्रभावशाली नेताओं को भी इस आयोजन में अपेक्षित महत्व नहीं मिला। इससे क्षेत्रीय नेतृत्व के समर्थकों में नाराजगी की बातें सामने आ रही हैं।
2027 की राजनीति की झलक या महज संयोग?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल पोस्टरों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जिले में राजनीतिक वर्चस्व की जंग के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। कौन संगठन में कितना प्रभाव रखता है और किसकी पकड़ मजबूत है, इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।


