नोएडा। आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर उपभोक्ता आयोग के हालिया फैसले के बाद नोएडा में नई बहस छिड़ गई है। सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सवाल उठाया है कि जब आरडब्ल्यूए के पास न कानूनी अधिकार हैं, न प्रशासनिक शक्तियां और न ही पर्याप्त बजट, तब हर कुत्ता काटने की घटना का जिम्मेदार केवल आरडब्ल्यूए को कैसे ठहराया जा सकता है? उन्होंने कहा कि यदि आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करना है तो सबसे पहले नोएडा प्राधिकरण को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
‘5000 रुपये सालाना में सुरक्षा भी, सफाई भी… अब कुत्तों का आतंक भी रोकें?’
दिव्य कृष्णात्रेय ने बताया कि सेक्टर-105 में करीब 1044 प्लॉट हैं, जबकि आरडब्ल्यूए के नियमित सदस्य केवल करीब 400 हैं। प्रत्येक सदस्य से केवल ₹5000 वार्षिक मेंटेनेंस शुल्क लिया जाता है, जिससे सुरक्षा गार्ड, बिजली, प्लंबर, पार्कों की देखरेख और अन्य मूलभूत सुविधाओं का खर्च चलता है। उन्होंने कहा कि इतने सीमित संसाधनों के बावजूद आरडब्ल्यूए से यह अपेक्षा करना कि वह आवारा कुत्तों जैसी जटिल प्रशासनिक समस्या का समाधान कर दे, पूरी तरह अव्यावहारिक है।
‘नियम तोड़ने वाले डॉग ओनर्स और अवैध डॉग शेल्टर बना रहे हालात बदतर’
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि समस्या केवल आवारा कुत्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई पालतू कुत्तों के मालिक भी बिना लीश के उन्हें सड़कों और पार्कों में घुमाते हैं। विरोध करने पर वे विवाद पर उतर आते हैं, जबकि उनके खिलाफ कार्रवाई का अधिकार आरडब्ल्यूए के पास नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई रिहायशी मकानों में अवैध डॉग शेल्टर संचालित किए जा रहे हैं, जहां दर्जनों कुत्ते रखे जाते हैं और बाद में उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। ऐसे मामलों पर कार्रवाई करना पूरी तरह नोएडा प्राधिकरण की जिम्मेदारी है।
‘RWA को बलि का बकरा बनाकर नहीं सुलझेगी समस्या’
दिव्य कृष्णात्रेय ने कहा कि केवल आरडब्ल्यूए पर जुर्माना लगाने या उसे जिम्मेदार ठहराने से न तो बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और न ही आवारा कुत्तों की समस्या समाप्त होगी। उन्होंने मांग की कि नोएडा प्राधिकरण अवैध डॉग शेल्टरों पर तत्काल कार्रवाई करे, नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉग ओनर्स पर सख्ती बरते, बड़े स्तर पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाए तथा स्पष्ट जवाबदेही तय करे। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएगा, तब तक नोएडा की सड़कों और पार्कों को सुरक्षित बनाना संभव नहीं होगा।


