नोएडा। देश में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। आरटीआई कार्यकर्ता एवं सामाजिक चिंतक डॉ. रंजन तोमर की पहल पर असम सरकार ने पेंगोलिन के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाने का आश्वासन दिया है। सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त जानकारी में सामने आया था कि लगातार दो वर्षों तक भारत में पेंगोलिन के सर्वाधिक शिकार के मामले असम राज्य से दर्ज किए गए, जिसके बाद डॉ. तोमर ने इस मुद्दे को सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया।
काजीरंगा मॉडल की तर्ज पर मांगी थी विशेष संरक्षण नीति
डॉ. रंजन तोमर ने असम सरकार को भेजे अपने विस्तृत पत्र में आग्रह किया था कि जिस प्रकार काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक सींग वाले गैंडों की सुरक्षा के लिए विशेष रणनीति अपनाकर शिकार पर प्रभावी नियंत्रण किया गया, उसी प्रकार पेंगोलिन जैसे संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी विशेष नीति, सख्त कानून और प्रभावी प्रवर्तन तंत्र लागू किया जाए। उनका कहना था कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पेंगोलिन की संख्या पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
असम सरकार ने दिया सकारात्मक जवाब
डॉ. तोमर की पहल पर संज्ञान लेते हुए असम सरकार ने अपने आधिकारिक उत्तर में बताया कि वन्यजीव अपराधों और वन्यजीवों की अवैध तस्करी पर रोक लगाने के लिए आवश्यक एवं प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसे पेंगोलिन संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से अवैध शिकार और तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
‘RTI बदलाव का प्रभावी माध्यम, वन्यजीव संरक्षण सबकी जिम्मेदारी’
डॉ. रंजन तोमर ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि असम सरकार के प्रयासों से पेंगोलिन के अवैध शिकार में उल्लेखनीय कमी आएगी और यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त तथ्यों के आधार पर जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से सरकारों तक पहुंचाया जा सकता है और सकारात्मक प्रशासनिक बदलाव संभव हैं। यही इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है।


