नोएडा। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की बढ़ती लागत के बीच गौतमबुद्ध नगर के किसान तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के तहत नवंबर 2024 से अब तक जिले में प्राकृतिक खेती का दायरा 1000 एकड़ तक बढ़ गया है। कृषि विभाग का कहना है कि प्रशिक्षण और जागरूकता अभियानों के कारण हर वर्ष नए किसान इस पद्धति से जुड़ रहे हैं। इससे खेती की लागत घटने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
कई फसलों की हो रही प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान धान, गेहूं, बाजरा, सरसों और दालों के अलावा टमाटर, भिंडी, लौकी, मिर्च समेत विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस पद्धति में रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता, जिससे उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है।
प्राकृतिक संसाधनों से तैयार होती है खाद
जिला कृषि अधिकारी विवेक दुबे ने बताया कि प्राकृतिक खेती में गोबर, गोमूत्र, जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। इस पद्धति का पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। विभाग किसानों को इसके लाभों के बारे में लगातार जागरूक कर रहा है।
प्रशिक्षण के जरिए बढ़ रही किसानों की भागीदारी
कृषि विभाग समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर और खेतों पर प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। विभाग का मानना है कि आने वाले समय में जिले में प्राकृतिक खेती का रकबा और बढ़ेगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ टिकाऊ कृषि प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी।


