नोएडा। तेजी से विकसित हो रहे ग्रेटर नोएडा में आने वाले वर्षों में पानी की मांग में बड़ा इजाफा होने की संभावना है। शहर की बढ़ती आबादी, नए रिहायशी प्रोजेक्ट, औद्योगिक इकाइयों और कमर्शियल गतिविधियों को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने दीर्घकालिक जलापूर्ति योजना पर काम शुरू कर दिया है। अनुमान के मुताबिक अगले पांच साल में पानी की मांग करीब 35 एमएलडी बढ़ सकती है। फिलहाल शहर में कुल पानी की मांग लगभग 245 एमएलडी है।
60 एमएलडी गंगाजल से हो रही आपूर्ति, बाकी भूजल पर निर्भरता
वर्तमान में ग्रेटर नोएडा को गंगाजल परियोजना के तहत करीब 60 एमएलडी पानी मिल रहा है। शहर की बाकी जरूरत भूजल और अन्य स्रोतों से पूरी की जा रही है। पानी की मांग लगातार बढ़ने के कारण प्राधिकरण अब जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करने की तैयारी में है। लक्ष्य है कि अगले पांच साल में बढ़ी हुई 35 एमएलडी मांग को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।
नए जलाशयों से गर्मियों में कम होगी पानी की किल्लत
नई योजना के तहत शहर के अलग-अलग सेक्टरों में नए जलाशयों का निर्माण कराया जाएगा। इन जलाशयों में पानी का पर्याप्त भंडारण किया जाएगा, जिससे जरूरत के समय सीधे घरों तक नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। प्राधिकरण का मानना है कि इससे गर्मियों में लो प्रेशर और पानी की कमी की समस्या कम होगी। जलाशयों में बफर स्टॉक भी रखा जाएगा, ताकि किसी आपात स्थिति या पाइपलाइन की मरम्मत के दौरान भी जलापूर्ति प्रभावित न हो।
पुरानी पाइपलाइन होगी अपग्रेड, स्मार्ट मीटरिंग पर भी जोर
जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को अपग्रेड किया जाएगा। इससे लीकेज कम करने और पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम लागू करने पर भी काम किया जा रहा है। जल विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक राजीव कुमार के अनुसार, जल भंडारण के साथ सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करना जरूरी है। योजना के तहत जमीन चिह्नित करने और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है, ताकि आने वाले वर्षों में ग्रेटर नोएडा के लोगों को नियमित और बेहतर जलापूर्ति मिल सके।


