नोएडा में फोनरवा के विरोध का असर: अब बदलेगी नोएडा की पूरी सफाई व्यवस्था,

नोएडा। शहर में कई दिनों तक चले कूड़ा संकट, जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर और फोनरवा समेत आरडब्ल्यूए संगठनों के विरोध के बाद आखिरकार नोएडा प्राधिकरण हरकत में आ गया है। कूड़ा वाहन चालकों की लगातार हड़ताल और डोर-टू-डोर कलेक्शन व्यवस्था फेल होने पर प्राधिकरण ने मौजूदा एजेंसी को तय समय से पहले हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। अब पूरे शहर की सफाई व्यवस्था नए सिरे से तैयार की जाएगी और अलग-अलग वर्क सर्किलों में नई एजेंसियां तैनात करने की योजना बनाई जा रही है.

फोनरवा की शिकायत के बाद बढ़ा दबाव

हाल ही में फोनरवा अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ  विशेष कार्याधिकारी क्रांति शेखर से मुलाकात कर शहर में फैली गंदगी, कूड़ा वाहनों की हड़ताल और स्वास्थ्य संकट पर नाराजगी जताई थी। प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा था कि बार-बार की हड़तालों से शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

इंजीनियरों की निगरानी फेल, एजेंसी पर उठे सवाल

समीक्षा में सामने आया कि डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली एजेंसी पर प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही थी। कई वर्क सर्किलों में इंजीनियरों की तरफ से मॉनिटरिंग लगभग नाममात्र रही, जिसके कारण व्यवस्था लगातार बिगड़ती चली गई। शहर के अलग-अलग सेक्टरों और गांवों से रोज शिकायतें मिल रही थीं कि कूड़ा गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच रहीं। मजबूर होकर लोग सड़कों, खाली प्लॉटों और ग्रीन बेल्ट में कूड़ा फेंकने लगे थे।

2018 से चल रही एजेंसी अब हटेगी

मौजूदा समय में पूरे शहर से डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का जिम्मा एजी एन्वायरो एजेंसी के पास है। प्राधिकरण ने दिसंबर 2018 में 10 साल के लिए एजेंसी से करार किया था। एजेंसी को घरों, बाजारों और कंपनियों से कूड़ा उठाकर सेक्टर-145 स्थित बायोरेमिडिएशन प्लांट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी। फिलहाल एजेंसी की करीब 225 गाड़ियां शहर में चल रही हैं, लेकिन इसके बावजूद शिकायतें कम नहीं हुईं। समीक्षा बैठकों में एजेंसी पर कम वाहन चलाने, खराब गाड़ियां दिखाने और काम में लापरवाही जैसे आरोप भी लगते रहे हैं।

अब हर पांच वर्क सर्किल पर अलग एजेंसी की तैयारी

नई योजना के तहत प्राधिकरण पूरे शहर को छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग एजेंसियों को जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव है कि हर पांच वर्क सर्किल पर एक एजेंसी तैनात की जाए ताकि जवाबदेही तय हो सके। नई एजेंसियों के लिए यह भी अनिवार्य किया जाएगा कि वे गांवों की संकरी गलियों और अंतिम मकान तक से कूड़ा उठाएं। इसके लिए मोटरसाइकिल आधारित कलेक्शन सिस्टम लागू करने की योजना है।

नई व्यवस्था से बढ़ेगा वित्तीय बोझ

हालांकि मौजूदा एजेंसी को तय समय से पहले हटाना प्राधिकरण पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा सकता है। 2018 में लगभग 1440 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से करार हुआ था, जो महंगाई बढ़ने के बाद अब करीब 1850 रुपये प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है। अधिकारियों का अनुमान है कि नई एजेंसियों के टेंडर में यह दर 2000 रुपये प्रति मीट्रिक टन से ऊपर जा सकती है।

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