नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा भूमि मुआवजा घोटाले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को भंग कर मामले की जांच उत्तर प्रदेश राज्य विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए विजिलेंस ब्यूरो को तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
अतिरिक्त मुआवजे और कमीशनखोरी के आरोप
मामला नोएडा प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण के दौरान नियमों की अनदेखी कर कुछ चुनिंदा किसानों और जमीन मालिकों को करोड़ों रुपये का अतिरिक्त एवं कथित रूप से अवैध मुआवजा देने से जुड़ा है। आरोप है कि अधिकारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत से करीब 10 प्रतिशत नकद कमीशन लेकर यह पूरा खेल संचालित किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
छह एफआईआर और विजिलेंस को सौंपे जाएंगे रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के बाद इस मामले में अब तक छह एफआईआर दर्ज कराई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि इनमें तीन एफआईआर अधिकारियों और जमीन मालिकों की कथित सांठगांठ तथा तीन आय से अधिक संपत्ति के मामलों से संबंधित हैं। अदालत ने एसआईटी को भंग करते हुए सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड विजिलेंस ब्यूरो को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
भूमि मालिकों को राहत, गिरफ्तारी पर रोक जारी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहले से गिरफ्तारी से संरक्षण प्राप्त किसानों और जमीन मालिकों को राहत बरकरार रखते हुए उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक जारी रखी। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और निचली अदालतें कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से मामले की सुनवाई और निर्णय लेंगी। अब इस बहुचर्चित घोटाले की आगे की जांच विजिलेंस ब्यूरो की निगरानी में होगी।


