नोएडा। देश में संरक्षित वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. रंजन तोमर को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी में पता चला है कि वर्ष 2020 से अप्रैल 2026 तक देशभर में 114 काले हिरणों की शिकार, अवैध शिकार या संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है।
यह जानकारी भारत सरकार के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) ने आरटीआई के जवाब में उपलब्ध कराई है। ब्यूरो के अनुसार यह आंकड़े विभिन्न राज्यों के वन विभागों और पुलिस विभागों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर तैयार किए गए हैं।
आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें, मध्य प्रदेश में सबसे अधिक गिरफ्तारी
आरटीआई से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक काले हिरणों की मौत और शिकार की सबसे अधिक घटनाएं आंध्र प्रदेश में दर्ज की गईं। वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में मध्य प्रदेश सबसे ऊपर रहा, जहां 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
कई राज्यों में शिकारी गिरफ्तार
ब्यूरो द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार शिकार से जुड़े मामलों में अलग-अलग राज्यों में गिरफ्तारियां भी हुईं। इनमें आंध्र प्रदेश में 7, कर्नाटक में 6, बिहारमें 1, मध्य प्रदेश में 12, महाराष्ट्र में 4 और झारखंड में 4 आरोपियों की गिरफ्तारी दर्ज की गई।
“वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर चिंता”
डॉ. रंजन तोमर ने कहा कि काला हिरण देश का संरक्षित वन्यजीव है और उसका शिकार कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही घटनाएं वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से साफ है कि वन्यजीव अपराधों को रोकने के लिए राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सख्त निगरानी की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केवल सरकारी एजेंसियों के भरोसे वन्यजीव संरक्षण संभव नहीं है, बल्कि समाज की भागीदारी और जनजागरूकता भी बेहद जरूरी है।
त्वरित कार्रवाई और सख्त निगरानी की मांग
डॉ. तोमर ने मांग की कि काले हिरण समेत अन्य संरक्षित वन्यजीवों के शिकार से जुड़े मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और दोषियों के खिलाफ तेजी से कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।






