
नोएडा। नोएडा की राजनीति में 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन सियासी गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी है। अब मैदान में एक और खिलाड़ी की एंट्री हुई है—नाम है ‘लोग पार्टी’। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व वरिष्ठ IAS अधिकारी विजय शंकर पाण्डेय रविवार को नोएडा पहुंचे और पार्टी के नोएडा प्रत्याशी सौरभ गोयल के पक्ष में लोगों से संवाद किया। यानी अब नोएडा की राजनीति में सवाल सिर्फ “कौन सा दल?” का नहीं, बल्कि “कितने दल?” का भी होता जा रहा है। वैसे पार्टी का नाम ‘लोग पार्टी’ है, तो उम्मीद यही होगी कि सबसे पहले लोग ही जुड़ें—और फिर राजनीति भी।
VIP वाली राजनीति के बीच ‘योग्यता’ की एंट्री!
विजय शंकर पाण्डेय ने बताया कि पार्टी उम्मीदवार चुनने में योग्यता को प्राथमिकता दे रही है। नोएडा से सौरभ गोयल को आगे किया गया है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई, कारोबारी पृष्ठभूमि और 2022 में निर्दलीय चुनाव लड़ने का अनुभव उनके परिचय का हिस्सा है। पार्टी के मुताबिक उनका चयन उनकी योग्यता और सामाजिक पहचान को देखते हुए किया गया। अब सियासी गलियारों में असली परीक्षा यही होगी कि कागज पर योग्यता और जमीन पर जनसमर्थन—दोनों का हिसाब कितना मिलता है।

सामने BJP के पंकज सिंह, मुकाबला अभी लंबा है!
नोएडा विधानसभा सीट से भाजपा के मौजूदा विधायक पंकज सिंह के सामने ‘लोग पार्टी’ ने सौरभ गोयल को उतारने का ऐलान किया है। हालांकि 2027 का चुनाव अभी बाकी है और अंतिम तस्वीर नामांकन के बाद ही साफ होगी। लेकिन छोटी पार्टियों की राजनीति में एक दिलचस्प बात हमेशा रहती है—बड़ा सवाल यह नहीं कि पार्टी कितनी बड़ी है, सवाल यह है कि उसका उम्मीदवार कितने लोगों तक पहुंच पाता है। नोएडा में जहां बड़े राजनीतिक दलों के पास संगठन और कार्यकर्ताओं का मजबूत ढांचा है, वहीं ‘लोग पार्टी’ को अपनी पहचान और संगठन जमीन पर खड़ा करने की चुनौती भी रहेगी।
अब असली फैसला ‘लोग’ करेंगे!
सौरभ गोयल के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे 2022 के निर्दलीय चुनाव से आगे बढ़कर इस बार अपनी राजनीतिक पहचान को व्यापक बना पाएंगे? वहीं ‘लोग पार्टी’ के लिए चुनौती सिर्फ प्रत्याशी घोषित करने की नहीं, बल्कि लोगों को पार्टी से जोड़ने और वोट में बदलने की होगी। फिलहाल पार्टी ने नोएडा में दस्तक दे दी है। अब पोस्टर, प्रेस कॉन्फ्रेंस और परिचय के बाद अगला अध्याय जनता के बीच लिखा जाएगा—क्योंकि चुनाव में आखिरकार पार्टी का नाम चाहे ‘लोग पार्टी’ हो, फैसला तो लोग ही करते हैं।


