
ग्रेटर नोएडा। बड़ी आपदा के दौरान जब कई लोग अलग-अलग स्थानों पर फंस जाते हैं, तब राहत और बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक जल्द पहुंचने की होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए चार युवाओं ने एआई आधारित आपदा बचाव प्रणाली ‘जीवनसेतु’ तैयार करने की पहल की है। यह सिस्टम मलबे में फंसे लोगों की पहचान करने के साथ बचाव दल को यह तय करने में मदद करने की परिकल्पना पर आधारित है कि सबसे पहले कहां सहायता पहुंचाई जानी चाहिए।

ड्रोन पहले करेगा प्रभावित क्षेत्र की निगरानी
बुद्धा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर के बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र अमन गुप्ता ने बताया कि उनकी टीम में खुशी सिंह, शुभी शुक्ला और अरुण साहनी शामिल हैं। टीम एयरोरेस्क्यू के तहत इस सिस्टम पर काम कर रही है। आपदा के बाद जिन इलाकों में बचावकर्मियों का तुरंत पहुंचना मुश्किल होगा, वहां ड्रोन पहले पहुंचकर प्रभावित क्षेत्र को स्कैन करेगा और वहां की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराएगा।
थर्मल कैमरे से मिलेगी फंसे लोगों की जानकारी
‘जीवनसेतु’ में ड्रोन के साथ थर्मल कैमरा, आरजीबी कैमरा, जीपीएस और पर्यावरण सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। थर्मल इमेजिंग के जरिए कम दृश्यता वाले इलाकों में शरीर की गर्मी के संकेतों को तलाशने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सिस्टम प्रभावित क्षेत्र की तस्वीरों और सेंसर से मिली जानकारी का विश्लेषण कर बचाव दल तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने में मदद करेगा।
एआई बताएगा कहां खतरा और मदद की जरूरत ज्यादा
सिस्टम में एज एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके जरिए इंसान और जानवर की मौजूदगी के साथ आग, अधिक तापमान और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी। ‘जीवनसेतु’ का उद्देश्य केवल प्रभावित क्षेत्र की तस्वीरें उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पीड़ित की स्थिति, स्थान, आसपास के खतरे और तात्कालिकता जैसी जानकारियों के आधार पर राहत टीम को बचाव कार्य की प्राथमिकता तय करने में सहायता देना है।


