AOA बनने से पहले मेंटेनेंस बढ़ाना कितना वैध? पूर्व नोएडा DM बी.एन. सिंह ने बिल्डरों को दिखाया कानून का आईना, फ्लैट मालिकों के लिए बड़ी राहत

दीप चौधरी, ग्रेटर नोएडा। सुपरटेक इकोविलेज-1 समेत हाईराइज सोसायटियों में बढ़ाए जा रहे मेंटेनेंस चार्ज को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गौतमबुद्ध नगर के पूर्व जिलाधिकारी और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी बी.एन. सिंह ने एक परामर्श नोट जारी कर स्पष्ट किया है कि AOA (एसोसिएशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स) के गठन से पहले बिल्डर या उसकी एजेंसी मनमाने ढंग से मेंटेनेंस चार्ज नहीं बढ़ा सकती।

“बिल्डर की मनमानी नहीं चलेगी”

बी.एन. सिंह ने यूपी अपार्टमेंट एक्ट-2010 का हवाला देते हुए कहा है कि मेंटेनेंस शुल्क बढ़ाने के लिए पारदर्शी और कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। केवल खर्च बढ़ने का हवाला देकर निवासियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जा सकता।

हिसाब दो, तभी बढ़ाओ शुल्क

परामर्श नोट में कहा गया है कि यदि मेंटेनेंस चार्ज बढ़ाया जाता है तो उसका आधार स्पष्ट होना चाहिए। बिल्डर को आइटम-वाइज बजट, खर्च का ब्योरा, लागत का आधार और तकनीकी औचित्य निवासियों के सामने रखना होगा। पंप, ट्रांसफॉर्मर, एसटीपी और अन्य बड़े पूंजीगत खर्चों को सामान्य CAM चार्ज में शामिल नहीं किया जा सकता।

AOA नहीं बनी तो भी नहीं मिली खुली छूट

बी.एन. सिंह ने साफ किया कि AOA का गठन न होने का मतलब यह नहीं है कि बिल्डर को असीमित अधिकार मिल जाएं। वहीं निवासियों को भी वैध मेंटेनेंस शुल्क देने से इनकार नहीं करना चाहिए। लेकिन अगर शुल्क वृद्धि का कोई स्पष्ट आधार नहीं है तो निवासी सक्षम प्राधिकरण, GNIDA और यूपी रेरा का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

सोसायटियों में छिड़ सकती है नई बहस

इस परामर्श नोट के सामने आने के बाद ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई सोसायटियों में मेंटेनेंस शुल्क बढ़ोतरी को लेकर नई बहस शुरू होने की संभावना है। हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए यह नोट राहत और जागरूकता दोनों का संदेश माना जा रहा है।

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