नोएडा। एसएससी समेत ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले गिरोह के तार परीक्षा केंद्रों से जुड़े होने का खुलासा हुआ है। 31 जुलाई को नोएडा एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार आरोपी लोकेश से पूछताछ में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने तक सीमित नहीं था। गिरोह से जुड़े जालसाजों की परीक्षा केंद्रों में भी हिस्सेदारी होने की जानकारी मिली है। एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और तकनीकी सिस्टम की जानकारी जुटाकर नकल कराने की योजना तैयार करते थे।
92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन बरामद
एसटीएफ की पूछताछ में पता चला कि गिरोह से जुड़े आरोपियों के पास परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, कंप्यूटर सिस्टम और निगरानी तंत्र की विस्तृत जानकारी थी। लोकेश के पास से 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन बरामद की गई थीं। जांच के अनुसार, लोकेश वर्ष 2017 से इन स्क्रीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तैयार कर अलग-अलग राज्यों में सक्रिय नकल गिरोहों को उपलब्ध करा रहा था। अब तक की जांच में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में नेटवर्क होने की जानकारी सामने आई है। एसटीएफ के मुताबिक, लोकेश खुद उपकरण तैयार करता था और जरूरत के अनुसार नकल गिरोहों को उनकी सप्लाई करता था।
सात-आठ साल से संगठित कारोबार चलने का शक
एसटीएफ एसपी राजकुमार मिश्र ने बताया कि अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए गिरोहों की जरूरत अलग होती थी। इसी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार कर उपलब्ध कराए जाते थे। इससे जांच एजेंसी को आशंका है कि यह कोई अस्थायी व्यवस्था नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा संगठित कारोबार था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि सात-आठ वर्षों में यह नेटवर्क कितनी परीक्षाओं तक पहुंचा और कितने अभ्यर्थियों ने इसका इस्तेमाल किया।
परीक्षा केंद्रों के कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच की एक कड़ी अब परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोगों और पूर्व कर्मचारियों तक भी पहुंच गई है। एसटीएफ यह पता कर रही है कि जिन केंद्रों पर नकल की शिकायत या संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं, वहां तैनात कर्मचारियों, तकनीकी स्टाफ और अन्य लोगों का किसी आरोपी से संपर्क था या नहीं। परीक्षा केंद्रों की तकनीकी व्यवस्था और निगरानी तंत्र की जानकारी गिरोह तक कैसे पहुंची, इसकी भी जांच की जा रही है।


