ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अरिहंत अंबर सोसाइटी में प्लास्टर गिरने से निजी कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक विकास चावला की मौत के मामले में अब तक बिल्डर कंपनी के जिम्मेदारों की गिरफ्तारी नहीं होने पर निवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। घटना के कई दिन बाद भी पुलिस केवल पूछताछ तक सीमित है, जबकि सोसाइटी के लोग इसे सीधे तौर पर निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव में भारी लापरवाही का मामला बता रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। टीमें सोसाइटी के निवासियों, एओए पदाधिकारियों, मेंटेनेंस एजेंसी और संबंधित कर्मचारियों से अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ कर रही हैं। जांच के आधार पर आगे कार्रवाई की बात कही जा रही है।
2022 से गिर रहा था प्लास्टर, फिर भी नहीं चेता प्रबंधन
जांच में सामने आया है कि सोसाइटी में प्लास्टर गिरने की पहली घटना वर्ष 2022 में हुई थी। इसके बाद लगभग हर साल कई टावरों में प्लास्टर टूटकर गिरने की घटनाएं होती रहीं। 29 मार्च को भी इसी तरह का हादसा हुआ था, जिसके बाद एओए ने बिल्डर को ईमेल के जरिए फोटो और वीडियो भेजकर स्थिति से अवगत कराया था। बावजूद इसके स्थायी समाधान नहीं किया गया।
निवासियों का आरोप है कि यदि समय रहते मरम्मत और सुरक्षा जांच कराई जाती तो एक व्यक्ति की जान नहीं जाती।
बिल्डर ने हैंडओवर का दिया तर्क
पुलिस पूछताछ में बिल्डर पक्ष ने दावा किया है कि अप्रैल 2023 में सोसाइटी का हैंडओवर एओए को दे दिया गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि हैंडओवर के बाद दो वर्षों तक बिल्डर की नियुक्त एजेंसी ने मेंटेनेंस सेवाएं जारी रखीं और जहां-जहां कमियां थीं, उन्हें दुरुस्त किया गया।
हालांकि सोसाइटी के निवासी इस दावे को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण गुणवत्ता सही होती तो लगातार प्लास्टर गिरने की घटनाएं नहीं होतीं।
मेंटेनेंस कंपनी का कर्मचारी गिरफ्तार, बिल्डर पर सवाल बरकरार
मामले में पुलिस ने मेंटेनेंस कंपनी निंबस के कर्मचारी और सोसाइटी के मेंटेनेंस इंचार्ज दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन निवासियों का कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को सीमित नहीं किया जा सकता।
सोसाइटी के लोगों का आरोप है कि हादसा घटिया निर्माण सामग्री और लापरवाह निर्माण कार्य का परिणाम है। उनका कहना है कि बिल्डर कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों और परियोजना से जुड़े इंजीनियरों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
इस हादसे ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निवासी पूछ रहे हैं कि अगर पहले से लगातार शिकायतें और घटनाएं सामने आ रही थीं तो आखिर प्रशासन और बिल्डर ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। अब लोगों की मांग है कि जिले की सभी पुरानी हाईराइज सोसाइटियों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।






