नोएडा। संदिग्ध परिस्थितियों में 96 वर्षीय बुजुर्ग मुंशीलाल की मौत के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय) ने आरोपी नाती रामू उर्फ रामबाबू को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध नहीं कर सका।
मारपीट से मौत का आरोप साबित नहीं हुआ
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष भारतीय साक्ष्य अधिनियम के मानकों के अनुरूप यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी की कथित मारपीट के कारण ही बुजुर्ग की मौत हुई। उपलब्ध साक्ष्य आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए।
गवाहियों में मिला विरोधाभास
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मामले में पेश किए गए गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास थे। साथ ही अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे आरोपी की संलिप्तता संदेह से परे साबित हो सके।
अदालत ने सुनाया बरी करने का फैसला
सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय) ने रामू उर्फ रामबाबू को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक होते हैं।


