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नोएडा में स्कूलों की हकीकत जांचने पहुंची CJP टीम, गेट बंद होने से बढ़ा सस्पेंस!

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नोएडा। दिल्ली से सटे नोएडा में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के सह-संयोजक एवं प्रवक्ता सौरभ दास अपनी टीम के साथ शहर के स्कूलों का जमीनी निरीक्षण करने पहुंचे। ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत CJP की टीम स्कूलों में पहुंचकर वहां पढ़ाई का माहौल, साफ-सफाई, शौचालय, भवन की स्थिति और बच्चों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का जायजा ले रही है।

स्कूलों के गेट अंदर से बंद… आखिर वजह क्या?

CJP टीम के स्कूल निरीक्षण की सूचना के बाद कुछ स्कूलों में हलचल की बात सामने आई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और पोस्ट के मुताबिक, कुछ स्थानों पर स्कूलों के गेट अंदर से बंद दिखाई दिए। हालांकि, गेट बंद किए जाने की वास्तविक वजह स्कूल प्रबंधन की ओर से अभी स्पष्ट नहीं की गई है। यही वजह है कि निरीक्षण के साथ एक नया सवाल भी खड़ा हो गया है—आखिर स्कूलों के प्रबंधन को जांच से परेशानी क्यों हुई?

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गढ़ी चौखंडी के स्कूल में टूटा शौचालय, गंदगी ने खोली व्यवस्था की पोल?

CJP के Gen-Z दस्ते ने गढ़ी चौखंडी के प्राइमरी स्कूल का भी निरीक्षण किया। टीम ने स्कूल के शौचालय की स्थिति पर सवाल उठाए। निरीक्षण के दौरान टूटे दरवाजे और गंदगी की ओर ध्यान दिलाते हुए सौरभ दास ने बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं पर सवाल खड़े किए।

इसी दौरान टीम को जानकारी मिली कि स्कूल की मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है। इसके बाद सौरभ दास ने सवाल उठाया कि अगर मरम्मत का बजट पहले ही स्वीकृत हो चुका है, तो काम अब तक क्यों नहीं हुआ?

सरकारी रिकॉर्ड बनाम जमीन की हकीकत—कौन सही?

CJP का कहना है कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाना है। टीम का दावा है कि नोएडा जैसे जिले में, जिसे प्रदेश के प्रमुख विकसित क्षेत्रों में गिना जाता है, स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी बेहतर होनी चाहिए।

अब असली परीक्षा यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में स्कूल की तस्वीर कितनी अच्छी है और जमीन पर स्थिति वास्तव में कैसी है?

सिर्फ शौचालय नहीं, पूरे स्कूल का होगा ऑडिट

CJP की टीम स्कूलों में केवल साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि पढ़ाई का माहौल, भवन की स्थिति, शौचालय, स्वच्छता और बच्चों को उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को भी जांचने की बात कह रही है। टीम ने युवाओं से भी अपील की है कि वे अपने आसपास के स्कूलों की स्थिति का ऑडिट करें और वास्तविक तस्वीर सामने लाएं।

नोएडा के बाद पश्चिमी यूपी की बारी?

नोएडा में शुरू हुआ यह अभियान आगे कहां तक पहुंचेगा, इस पर भी नजर बनी हुई है। यदि CJP की टीम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी सरकारी स्कूलों का निरीक्षण शुरू करती है, तो शिक्षा विभाग के सामने स्कूलों की जमीनी व्यवस्था को लेकर कई नए सवाल खड़े हो सकते हैं।

फिलहाल नोएडा में CJP के इस अभियान ने स्कूलों की व्यवस्थाओं, सरकारी बजट के इस्तेमाल और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि CJP की पूरी ऑडिट रिपोर्ट सामने आने पर नोएडा के स्कूलों की असली तस्वीर क्या निकलकर आती है?

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