नोएडा। नोएडा का नाम सुनते ही लोगों के मन में मेट्रो, सेक्टर-18 और 144 के व्यस्त बाजार, फिल्म सिटी तथा ऊंची-ऊंची आईटी इमारतों की तस्वीर उभरती है। रात में जगमगाती सड़कें आधुनिक शहर की पहचान बन चुकी हैं, लेकिन इन्हीं इमारतों के बीच बसे 81 गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जमीन के बदले विकास का किया गया था वादा
करीब 40 वर्ष पहले जब नोएडा के विकास की योजना बनी, तब अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर किसानों से जमीन मांगी। किसानों को भरोसा दिलाया गया कि बदले में उनके गांवों को शहर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। पक्की सड़कें, नालियां, स्कूल, अस्पताल, बेहतर जलनिकासी, पार्क और हरित पट्टी विकसित करने का वादा किया गया था।
मुआवजा मिला, लेकिन विकास का सपना अधूरा रहा
शहरीकरण की उम्मीद में किसानों ने अपनी जमीन प्राधिकरण को सौंप दी। बदले में उन्हें मुआवजा और एक-एक भूखंड तो मिला, लेकिन गांवों के समग्र विकास का सपना आज तक पूरा नहीं हो सका। गांवों के चारों ओर आधुनिक इमारतें खड़ी हो गईं, लेकिन गांवों के भीतर बुनियादी सुविधाओं की तस्वीर नहीं बदल सकी।
हर मानसून में उजागर होती है बदहाली
मानसून की पहली बारिश के साथ ही इन गांवों की समस्याएं फिर सामने आ जाती हैं। जलभराव, टूटी सड़कें और खराब जलनिकासी व्यवस्था लोगों की परेशानी बढ़ा देती हैं। हर साल बरसात में हालात बद से बदतर हो जाते हैं, जिससे साफ है कि हाईटेक नोएडा की चमक के बीच बसे इन गांवों तक विकास अब भी पूरी तरह नहीं पहुंच सका।


