नोएडा। परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्कूल बैग, स्वेटर और स्टेशनरी खरीदने के लिए डीबीटी के माध्यम से 1200 रुपये दिए जा रहे हैं। अब बेसिक शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि अभिभावकों ने इस राशि का उपयोग बच्चों के लिए जरूरी सामग्री खरीदने में किया है या नहीं।
प्रधानाध्यापकों को सौंपी गई जिम्मेदारी
बेसिक शिक्षा विभाग के निर्देश पर सभी प्रधानाध्यापक बिना यूनिफॉर्म और जूते-मोजे के स्कूल आने वाले छात्रों की सूची तैयार करेंगे। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के साथ मिलकर यह भी जांच की जाएगी कि संबंधित छात्रों के अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी की राशि पहुंची है या नहीं।
समस्या होने पर होगा समाधान
यदि किसी अभिभावक के खाते में डीबीटी की राशि नहीं पहुंची होगी या भुगतान से जुड़ी कोई समस्या सामने आएगी, तो उसका समाधान कराया जाएगा। वहीं जिन अभिभावकों को राशि मिलने के बावजूद बच्चों के लिए निर्धारित सामग्री नहीं खरीदी गई है, उन्हें अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीएम) की बैठकों में जागरूक किया जाएगा।
बीएसए बोले- हर छात्र तक पहुंचे योजना का लाभ
बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने बताया कि डीबीटी योजना का शत-प्रतिशत लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कई बार राशि खाते में आने के बाद भी बच्चे बिना यूनिफॉर्म के स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे मामलों में अभिभावकों से सीधे संवाद कर उन्हें बच्चों के लिए निर्धारित सामग्री खरीदने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


