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नोएडा के रामा अस्पताल में मां की मौत के बाद बेटे की लड़ाई, जांच रिपोर्ट में भी उठे सवाल

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नोएडा। सेक्टर-61 स्थित रामा अस्पताल में 52 वर्षीय पुष्पा देवी की उपचार के दौरान हुई मौत का मामला अब कई गंभीर सवालों के घेरे में है। पुष्पा देवी के बेटे मोहित शर्मा ने अस्पताल के चिकित्सकों और प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। मामले में गौतमबुद्धनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में भी मरीज के उपचार, CECT जांच और मेडिकल रिकॉर्ड से जुड़ी कई प्रक्रियात्मक एवं दस्तावेजी कमियां दर्ज की गई हैं।

14 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हुई थीं पुष्पा देवी

परिवार के अनुसार, छिजारसी निवासी पुष्पा देवी को 14 अप्रैल 2026 को हल्के बुखार और उल्टी की शिकायत के बाद रामा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके बेटे मोहित शर्मा का कहना है कि शुरुआती उपचार के दौरान उनकी मां की स्थिति में सुधार दिखाई दे रहा था और परिवार को डिस्चार्ज की उम्मीद थी।

परिवार के मुताबिक, इसके बाद 15 अप्रैल को CECT Abdomen जांच कराई गई। मोहित शर्मा का आरोप है कि CECT के बाद उनकी मां की हालत अचानक बिगड़ने लगी। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बाद में गाजियाबाद स्थित यशोदा मेडिसिटी ले जाया गया, जहां 16 अप्रैल को उनकी मौत हो गई।

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CECT के बाद बिगड़ी हालत, यहीं से शुरू हुए सवाल

पुष्पा देवी की मौत के बाद परिवार ने सवाल उठाया कि जब मरीज की हालत में सुधार बताया जा रहा था तो CECT क्यों कराया गया और जांच के बाद तबीयत बिगड़ने पर तत्काल उपचार की प्रक्रिया क्या रही?

मोहित शर्मा ने अधिकारियों से मामले की जांच की मांग करते हुए अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, नर्सिंग नोट्स, CECT से जुड़े दस्तावेज और CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग की है।

CMO जांच समिति की रिपोर्ट में क्या मिला?

29 मई 2026 को प्रस्तुत जांच आख्या में समिति ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार:

  • मरीज का CECT Abdomen प्राथमिक चिकित्सक की सहमति के बिना कराया जाना पाया गया।
  • मरीज को वार्ड से रेडियोलॉजी ले जाने संबंधी referred slip उपलब्ध नहीं मिली।
  • CECT से पहले दिए जाने वाले testing dose का प्रमाण रिकॉर्ड में नहीं मिला।
  • CECT के बाद मरीज की हालत बिगड़ने पर दिए गए उपचार में विलंब प्रतीत होने की बात रिपोर्ट में दर्ज की गई।
  • नर्सिंग नोट्स में sedation का उल्लेख था, लेकिन उसके लिए डॉक्टर के आदेश का रिकॉर्ड नहीं मिला।
  • जांच समिति ने अस्पताल प्रशासन और treating physician की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने तथा मांगे गए दस्तावेज अपूर्ण रूप से उपलब्ध कराने की बात भी दर्ज की।

लेकिन रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा क्या है?

जांच समिति की टिप्पणियों के बावजूद उपलब्ध रिपोर्ट ने यह अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया कि इन्हीं कमियों के कारण पुष्पा देवी की मृत्यु हुई। इसलिए अब मेडिकल रिकॉर्ड, विशेषज्ञ राय और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह स्थापित करना जरूरी है कि उपचार में सामने आई कमियों और मरीज की मौत के बीच कोई चिकित्सकीय संबंध था या नहीं।

बेटे का सवाल—आखिर उस दिन हुआ क्या था?

मोहित शर्मा का कहना है कि वह अपनी मां को सामान्य स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए थे। उनका आरोप है कि उपचार के दौरान हालात बदल गए और कुछ ही समय बाद उनकी मां को दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा।

उनका कहना है कि मां को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उनकी मौत के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और उस दिन अस्पताल में क्या हुआ, इसका जवाब परिवार को मिलना चाहिए।

CCTV और मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित कराने की मांग

परिवार ने मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है। इनमें अस्पताल का CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, नर्सिंग नोट्स, CECT रिपोर्ट, दवाओं का रिकॉर्ड और मरीज को रेडियोलॉजी ले जाने से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं।

परिवार का कहना है कि इन रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच से घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।

अब सबसे बड़े सवालों के जवाब कौन देगा?

इस पूरे मामले में कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं—

जब मरीज की हालत में सुधार बताया जा रहा था, तो CECT कराने का चिकित्सकीय आधार क्या था?

CECT से पहले आवश्यक प्रक्रियाओं और दस्तावेजों का पालन हुआ था या नहीं?

testing dose और sedation से जुड़े रिकॉर्ड क्यों नहीं मिले?

CECT के बाद हालत बिगड़ने पर उपचार में कथित देरी क्यों हुई?

एक परिवार न्याय नहीं, अपनी मां की मौत का सच मांग रहा है

पुष्पा देवी की मौत के बाद उनका बेटा लगातार जांच की मांग कर रहा है। CMO जांच समिति की रिपोर्ट ने मामले में कई प्रक्रियात्मक और दस्तावेजी सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष अभी बाकी है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और संबंधित जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं और क्या परिवार को उस सवाल का जवाब मिल पाता है, जो महीनों से उसके सामने खड़ा है—“मेरी मां के साथ उस दिन आखिर हुआ क्या था?”

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