नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा को उत्तर प्रदेश का सबसे आधुनिक और प्लांड सिटी माना जाता है। यहां मेट्रो, एक्सप्रेसवे, शिक्षा व औद्योगिक हब, आईटी पार्क और हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं शहर की पहचान हैं। लेकिन इस चमक-दमक के बीच बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
खुले गड्ढे और अधूरे निर्माण बन रहे खतरा
शहर की कई सड़कों के किनारे खुले गड्ढे, अधूरे नाले और बिना बैरिकेडिंग वाली निर्माण साइटें लोगों की जान के लिए खतरा बनी हुई हैं। इन स्थानों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से हर दिन हादसों की आशंका बनी रहती है।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक गड्ढों और निर्माण स्थलों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय नहीं होगी, बैरिकेडिंग और पर्याप्त रोशनी अनिवार्य नहीं की जाएगी तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई का डर नहीं होगा, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल है।
युवराज मेहता जैसे हादसे दोहराने से रोकना होगा
लापरवाही का यही सिलसिला जारी रहा तो युवराज मेहता जैसे और नाम हादसों की फाइलों में जुड़ते रहेंगे। शहर के विकास के साथ सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।


