
ग्रेटर नोएडा। शहर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इस साल अक्टूबर में पहली बार ग्रेटर नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया। शुक्रवार सुबह सात बजे शहर का एक्यूआई 346 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के देशभर के 254 शहरों और 496 निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर के रूप में सामने आया। इससे पहले बृहस्पतिवार को शहर का एक्यूआई 219 दर्ज किया गया था, जो खराब श्रेणी में था।

15 घंटे में 127 अंक बढ़ा प्रदूषण
कुछ ही घंटों में प्रदूषण के स्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। बृहस्पतिवार को 219 रहा एक्यूआई शुक्रवार सुबह तक बढ़कर 346 पहुंच गया। करीब 15 घंटे में इसमें 127 अंकों की वृद्धि हुई। वहीं, नोएडा में भी हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है और शुक्रवार सुबह एक्यूआई 280 के पार दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हवा की गति नहीं बढ़ी तो ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी यानी 400 के पार पहुंच सकता है।
वाहनों का धुआं और निर्माण कार्य की धूल प्रमुख कारण
हवा की धीमी गति और बढ़ती नमी प्रदूषण को और गंभीर बना रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और हवा की गति कम होना प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। पिछले दो दिनों से हवा में नमी बढ़ने के कारण प्रदूषक कण वातावरण में नीचे की ओर बने हुए हैं। इससे हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रेप के नियम लागू करने के निर्देश, स्वास्थ्य पर भी असर
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्राधिकरण ने कार्रवाई तेज करने की बात कही है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी विकास मिश्रा के अनुसार, ग्रेप के नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव कराने और खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाने के लिए टीमों को सक्रिय किया है। वहीं, अस्पतालों में आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत वाले मरीज बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को सुबह-शाम बाहर टहलने से बचने और जरूरत पड़ने पर मास्क पहनने की सलाह दी है।


