ग्रेटर नोएडा। पारंपरिक स्वाद, खास बनावट और शुद्धता के लिए प्रसिद्ध जेवर का घेवर हर साल सावन के महीने में लोगों की पहली पसंद रहता है। हरियाली तीज से लेकर रक्षाबंधन तक इसकी मांग काफी बढ़ जाती है और बड़ी संख्या में लोग इसे खरीदते हैं।
दिल्ली-एनसीआर समेत दूर-दराज तक पहुंचता है घेवर
जेवर का घेवर केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर और दूसरे शहरों में भी रिश्तेदारों को भेजा जाता है। त्योहारों के दौरान लोग इसे उपहार के रूप में भेजते हैं और इसके पारंपरिक स्वाद का आनंद लेते हैं।
दूध और गैस महंगी होने से बढ़ी लागत
इस बार दूध की किल्लत और रसोई गैस सिलेंडर के बढ़े दामों ने घेवर बनाने की लागत बढ़ा दी है। इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर पड़ा है। पिछले वर्ष की तुलना में घेवर के दाम 100 से 250 रुपये तक बढ़ गए हैं, जिससे ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
महंगे दाम के बावजूद दुकानदारों को नहीं हो रहा फायदा
दुकानदारों का कहना है कि बढ़ी हुई लागत के कारण मजबूरी में कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। इसके बावजूद मुनाफा पहले जैसा नहीं मिल रहा है। उनका मानना है कि महंगे कच्चे माल और उत्पादन लागत की वजह से इस बार घेवर की बिक्री घाटे का सौदा साबित हो रही है।


