माता-पिता के झगड़ों के बीच खोता बचपन, ‘पुतुन’ ने दिखाई सच्चाई

 नोएडा। माता-पिता के झगड़ों के बीच बच्चे अपना बचपन और खुद को खो रहे हैं। कुछ ऐसा ही सात वर्ष की मासूम बच्ची पुतुन के साथ हुआ। उसकी कहानी ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि पारिवारिक कलह का सबसे गहरा असर अक्सर बच्चों पर पड़ता है।

2. फिल्म ने खींचा दर्शकों का ध्यान

नोएडा के फेज-2 स्थित एक्का इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री के सभागार में आयोजित जागरण फिल्म फेस्टिवल (जेएफएफ) के दौरान फिल्म ‘पुतुन’ का प्रदर्शन किया गया। घरेलू कलह की संवेदनशील कहानी पर आधारित इस फिल्म ने अपनी सादगी और प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान पूरी तरह अपनी ओर खींच लिया।

3. संवेदनशील प्रस्तुति ने छोड़ी गहरी छाप

फिल्म में बिना किसी शोर-शराबे और नाटकीयता के घरेलू विवादों की सच्चाई को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया। कहानी के माध्यम से यह दिखाया गया कि परिवार के तनावपूर्ण माहौल का बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है।

4. स्क्रीनिंग के बाद भावुक हुआ सभागार

फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान पूरे सभागार में सन्नाटा छाया रहा। फिल्म समाप्त होते-होते कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं। दर्शकों ने फिल्म की संवेदनशील विषय-वस्तु और प्रभावशाली प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाली फिल्म बताया।

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

इसे भी पढे ----

वोट जरूर करें

क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड ड्रग्स केस में और भी कई बड़े सितारों के नाम सामने आएंगे?

View Results

Loading ... Loading ...

आज का राशिफल देखें