नोएडा में 2018 के भीषण हादसे के बाद भी कई जर्जर इमारतें आज तक गिराई नहीं जा सकी हैं। दो इमारतें एक तरफ झुकी हुई हैं और जैक व लोहे की शटरिंग के सहारे खड़ी हैं। इन खतरनाक भवनों में गरीब परिवार रह रहे हैं, जबकि सामने फुटपाथ पर दुकानें भी संचालित हो रही हैं। हर समय बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाया है।
2018 की दर्दनाक रात ने ली थी नौ लोगों की जान
17 जुलाई 2018 की रात शाहबेरी में दो अवैध बहुमंजिला इमारतें गिरने से कुछ माह की मासूम बच्ची समेत नौ लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे ने अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी थी। घटना के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच कराई गई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं।
जांच में उजागर हुआ अवैध निर्माण का बड़ा खेल
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि हाईकोर्ट द्वारा अधिग्रहण रद्द की गई जमीन पर बिल्डरों ने सैकड़ों अवैध बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दीं। निर्माण के दौरान गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। सस्ते फ्लैट का लालच देकर लोगों को मकान बेचे गए और नियमों को दरकिनार कर अवैध निर्माण का बड़ा कारोबार चलता रहा।
450 अवैध इमारतें मिलीं, फिर भी कार्रवाई अधूरी
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की जांच में शाहबेरी में 450 बहुमंजिला इमारतें, 1043 व्यक्तिगत भवन और कई दुकानें अवैध पाई गई थीं। कई इमारतों को खतरनाक घोषित कर सील भी किया गया, लेकिन अधिकांश भवन आज भी जस के तस खड़े हैं। इनमें हजारों लोग रह रहे हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
फोर्स मिलने पर होगी कार्रवाई
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक ए.के. सिंह ने बताया कि जर्जर इमारतों को गिराने के लिए पर्याप्त पुलिस बल की आवश्यकता है। इसके लिए पहले ही पत्राचार किया जा चुका है। फोर्स उपलब्ध होते ही अवैध और जर्जर इमारतों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।


