नई दिल्ली। गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती के अवसर पर तपस्या संगीत नृत्य कला केंद्र द्वारा ‘रबीन्द्र उत्सव 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम गुरुदेव की साहित्यिक, संगीत और दार्शनिक विरासत को समर्पित रहा, जिसमें संगीत, नृत्य और संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले।
रबीन्द्र संगीत और कथक ने बांधा समां
मयूर विहार फेज-1 स्थित कार्तियानी ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थान के विद्यार्थियों ने रबीन्द्र संगीत और कथक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का निर्देशन गुरु लिली भट्टाचार्जी और गुरु सुब्रत दास ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पुष्पार्पण और अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ, जिसमें कला और संगीत जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग शामिल हुए।

‘ध्रुपदी प्रकृति’ बनी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण
सांस्कृतिक संध्या में नृत्य नाटिका ‘ध्रुपदी प्रकृति’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। लाइव संगीत और कथक नृत्य के माध्यम से गुरुदेव की विभिन्न रचनाओं को मंच पर खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की प्रस्तुति, अनुशासन और समर्पण ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पंडित प्रोसेनजीत पोद्दार
कार्यक्रम में हिंदुस्तान आर्ट्स एंड म्यूज़िक सोसायटी के संस्थापक-सचिव और प्रसिद्ध तबला वादक पंडित प्रोसेनजीत पोद्दार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया।

30 वर्षों से कला और संस्कृति के संरक्षण में जुटा संस्थान
तपस्या संगीत नृत्य कला केंद्र पिछले 30 वर्षों से भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य कर रहा है। संस्था जरूरतमंद बच्चों को कला और संस्कृति से जोड़ने के लिए भी लगातार प्रयासरत है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी कलाकारों, संगीतज्ञों, अभिभावकों और दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए लोगों से कला और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश दिया।






