नोएडा पिलखुवा के वर्ष 2001 के चर्चित तिहरे हत्याकांड में पीड़ित परिवार ने एक बार फिर न्याय की मांग उठाई है। परिवार का कहना है कि लंबे कानूनी संघर्ष के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को मामले में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई पर विचार करने का निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने विशेष रूप से तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर पूरन सिंह मेहरा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
2001 में हुई थी महिला और दो मासूम बच्चों की हत्या
24 जुलाई 2001 को पिलखुवा के कृष्णगंज मोहल्ले में कपड़ा व्यापारी परिवार की बहू सीमा गर्ग तथा उनके दो बच्चों—भव्य (करीब 4-5 वर्ष) और प्रत्यक्ष (करीब 8 माह)—की घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया था। व्यापारियों ने बाजार बंद रखकर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया और पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।
जांच पर उठे सवाल, अधिकारियों पर गंभीर आरोप
इस मामले में थाना पिलखुवा में एफआईआर संख्या 221/2001 धारा 302 और 394 आईपीसी के तहत दर्ज की गई थी। वर्ष 2004 में ट्रायल कोर्ट ने दो सह-आरोपितों को बरी करते हुए विवेचना पर गंभीर टिप्पणियां की थीं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि तत्कालीन जांच अधिकारी पूरन सिंह मेहरा व अन्य अधिकारियों ने वास्तविक आरोपितों को बचाने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने और निर्दोष लोगों को फंसाने का प्रयास किया। मामला बाद में सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा, जहां आगे की जांच को लेकर आदेश पारित किए गए।


