बरौला के परिवार ने पेश की मिसाल, मृत्यु भोज की परंपरा छोड़ शिक्षा को बनाया प्राथमिकता ,समाज को नई राह दिखाता फैसला

नोएडा। समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में बरौला निवासी बादल बैसोया परिवार ने एक प्रेरणादायक पहल की है। परिवार ने अपनी पूज्य माताजी स्वर्गीय श्रीमती जगमाली जी (पत्नी स्वर्गीय महाराज सिंह, मेजर – पैरा कमांडो) की पावन स्मृति में परंपरागत मृत्यु भोज का आयोजन न करने का निर्णय लिया है।

शिक्षा और समाज सेवा पर होगा खर्च

परिवार ने घोषणा की है कि मृत्यु भोज पर होने वाले पूरे खर्च को बच्चों की शिक्षा और समाजहित के कार्यों में लगाया जाएगा। उनका मानना है कि इस राशि का उपयोग समाज के विकास और जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारने में अधिक सार्थक होगा।

सच्ची श्रद्धांजलि सेवा और संस्कार में

परिवार के अनुसार दिवंगत आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि दिखावे या आडंबर से नहीं, बल्कि ऐसे कार्यों से दी जा सकती है जो समाज और आने वाली पीढ़ियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं। यही सोच इस निर्णय की सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।

समाज के लिए बना प्रेरणादायक संदेश

बैसोया परिवार की यह पहल समाज के लिए एक अनुकरणीय संदेश मानी जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस तरह के निर्णय अन्य परिवारों को भी सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही ईश्वर से प्रार्थना की गई कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

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