नोएडा। गर्मी बढ़ने के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। खासकर टाइफाइड के मामलों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। दूषित पानी, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और साफ-सफाई की कमी इस बीमारी के फैलने की मुख्य वजह बन रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
गर्मियों में तेजी से फैलता है संक्रमण
फेलिक्स हॉस्पिटल की जनरल फिजिशियन डॉक्टर प्रियंका सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में टाइफाइड के मरीज सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा सामने आते हैं। यह बीमारी साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से फैलती है, जो दूषित पानी और भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। संक्रमित व्यक्ति के मल या मूत्र के संपर्क में आने से पानी और खाद्य पदार्थ संक्रमित हो जाते हैं, जिससे बीमारी तेजी से फैलती है। उन्होंने बताया कि सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, कटे फल, बर्फ और दूषित पेय पदार्थ भी संक्रमण का बड़ा कारण बनते हैं। कई लोग गर्मी में असुरक्षित स्रोतों का पानी पी लेते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।

टाइफाइड और पैराटाइफाइड दोनों खतरनाक
टाइफाइड मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला टाइफाइड फीवर, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होता है और दूसरा पैराटाइफाइड, जो साल्मोनेला पैराटाइफी बैक्टीरिया के कारण फैलता है। पैराटाइफाइड के लक्षण अपेक्षाकृत हल्के हो सकते हैं, लेकिन दोनों ही बीमारियां दूषित भोजन और पानी से फैलती हैं। भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों में टाइफाइड अब भी बड़ी स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। स्वच्छ पेयजल और बेहतर सैनिटेशन की कमी इसके प्रसार का प्रमुख कारण मानी जाती है।
टाइफाइड के प्रमुख लक्षण
- लगातार तेज बुखार
- सिरदर्द और कमजोरी
- भूख कम लगना
- पेट दर्द की शिकायत
- कब्ज या दस्त
- शरीर में दर्द और थकान
- उल्टी और बेचैनी
बचाव के लिए बरतें सावधानी
डॉक्टरों का कहना है कि साफ-सफाई और सुरक्षित खानपान से टाइफाइड से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना चाहिए और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। भोजन करने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है। बच्चों का समय पर टीकाकरण कराने से बीमारी का खतरा कम हो जाता है।
बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना खतरनाक
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से समस्या गंभीर हो सकती है। अधूरा इलाज करने पर बैक्टीरिया शरीर में बने रहते हैं और दोबारा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मरीजों को पर्याप्त आराम, हल्का भोजन और अधिक मात्रा में तरल पदार्थ लेने की सलाह दी गई है।






