नोएडा। मानसून की पहली बारिश के बाद शहर में जलभराव की समस्या को लेकर कोनरवा (नोएडा चैप्टर) ने नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संस्था ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजकर कहा है कि मानसून से पहले नालों, नालियों और सीवर लाइनों की सफाई एवं जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 1 जून 2026 को पूर्व सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
कोनरवा ने अपने पत्र में कहा कि पूर्व चेतावनी और लगातार अनुरोधों के बाद भी इस वर्ष मानसून की शुरुआती बारिश में ही नोएडा के कई सेक्टरों, मुख्य मार्गों और अंडरपासों में जलभराव की स्थिति बन गई। संस्था का कहना है कि हर वर्ष जलभराव की समस्या सामने आने के बावजूद स्थायी समाधान के लिए ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है।

सफाई कार्यों पर खर्च और जमीनी हकीकत पर उठाए सवाल
कोनरवा ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण द्वारा नालों और जल निकासी व्यवस्था की सफाई पर भारी धनराशि खर्च करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली बारिश में ही व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है। संस्था ने कहा कि नालों में सिल्ट और कचरा जमा रहने तथा सीवर व्यवस्था के उचित रखरखाव के अभाव में शहरवासियों को जलभराव, यातायात बाधित होने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वैज्ञानिक और समयबद्ध व्यवस्था बनाने की मांग
कोनरवा अध्यक्ष डॉ. पी. एस. जैन और महासचिव राजीव गर्ग ने प्राधिकरण से मांग की है कि जल निकासी व्यवस्था की मौजूदा कार्यप्रणाली की समीक्षा कर वैज्ञानिक, समयबद्ध और परिणाम आधारित प्रणाली विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि शहर को हर वर्ष जलभराव की समस्या से बचाने के लिए केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि धरातल पर प्रभावी परिणाम दिखाई देने चाहिए।
संस्था ने प्राधिकरण से इस मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी भी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि शहरवासियों की इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके।


