नोएडा:केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने वर्ष 2002 के चर्चित इंद्र देव सिंह हत्याकांड में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। फैसले के दौरान इंद्र देव सिंह की बेटी और नोएडा पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह तथा उनकी पत्नी नयनतारा सिंह अदालत में मौजूद रहीं।
दिनदहाड़े हुई थी हत्या
आठ अगस्त 2002 को लखनऊ के कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पास सीनियर एडवोकेट और लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष इंद्र देव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। बाद में सीबीआई जांच के दौरान अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए।
तीन आरोपी दोषी करार
सीबीआई ने वर्ष 2004 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने बृजेश यादव, पन्ना सिंह और विक्रम यादव को हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का दोषी पाया। सुनवाई के दौरान छह आरोपियों में से तीन की मौत हो चुकी थी। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर तीनों को भारतीय न्याय संहिता की समकक्ष हत्या संबंधी प्रावधान (पूर्व आईपीसी धारा 302) के तहत दोषी ठहराया।
जमीन विवाद बना हत्या की वजह
जांच में सामने आया कि इंद्र देव सिंह की हत्या पांच बीघा जमीन के विवाद को लेकर की गई थी। इस साजिश की अगुवाई एक बर्खास्त लेखपाल ने की थी। करीब 24 साल बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला और लंबे समय से लंबित इस हाईप्रोफाइल हत्याकांड का कानूनी पटाक्षेप हो गया।


